Monday, 7 July 2025

शहीद स्मृति द्वार पर राजनीति – मैनपुरी की शर्मनाक घटना

"शहीद का सम्मान छीन लिया गया – क्या यही है नया भारत?"

लेखक: विष्णु यादव, ग्राम नगला टांक, मैनपुरी

यह कहानी है अमर शहीद रामाधार सिंह यादव की – भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजीमेंट के वीर सपूत, जिन्होंने 10 सितंबर 1995 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से लड़ते हुए देश के लिए बलिदान दिया।

वर्ष 2022-23 में जिला पंचायत मैनपुरी ने उनके नाम पर स्मृति द्वार की स्वीकृति दी। परिवार ने वर्षों इंतज़ार किया, लेकिन जैसे ही द्वार बनकर तैयार हुआ, 6 अप्रैल 2025 की रात को, चोरी-छुपे, बिना सूचना के, द्वार पर एक अन्य शहीद का नाम भी जोड़ दिया गया।


कोई सार्वजनिक सूचना नहीं।
कोई ग्राम सभा प्रस्ताव नहीं।
कोई पारदर्शी प्रक्रिया नहीं।

सवाल ये नहीं कि दूसरा शहीद कौन है – सवाल ये है कि जिस स्मारक की योजना ही एक नाम के लिए बनी थी, उसमें बिना सहमति दूसरे का नाम कैसे जोड़ दिया गया?

1. उत्तर प्रदेश सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास नीति 2019 – स्मृति निर्माण में शहीद परिवार की सहमति अनिवार्य।

2. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 – बिना सूचना, द्वार पर नाम बदलना गंभीर उल्लंघन।

3. भारतीय संविधान – अनुच्छेद 21 (Right to Dignity) – शहीद व उनके परिवार की गरिमा का हनन।

4. लोक प्रशासन की पारदर्शिता नीति – निर्णय बिना सार्वजनिक चर्चा के लिया गया।

परिवार की शिकायतों को बार-बार दबाया गया।

IGRS पोर्टल पर डाली गई 10 से ज्यादा शिकायतें – पर हर बार संदेहास्पद अधिकारियों को ही जांच सौंप दी गई।

21 अप्रैल 2025 को जिलाधिकारी को ज्ञापन – अब तक कोई कार्यवाही नहीं।

जिला सैनिक कल्याण बोर्ड केवल एक पक्ष के साथ खड़ा रहा – क्या ये पक्षपात नहीं?

📢 मेरा सवाल...

> अगर एक शहीद के नाम को बदलने का अधिकार प्रशासन को है,
तो फिर क्या शहीदों का सम्मान केवल रस्म है?

🙏 मेरी अपील:

मैं, विष्णु यादव, अमर शहीद रामाधार सिंह यादव का पुत्र,
आप सब से – खासकर यादव समाज, पूर्व सैनिक संगठनों, पत्रकारों, न्यायप्रिय नागरिकों से निवेदन करता हूं:

👉 इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाइए।
👉 पोस्ट शेयर कीजिए, समर्थन दीजिए।
👉हमारा सम्मान बचाइए।

शहीद कोई भी हो, सम्मान सबका बराबर हो – पर बलिदान की पहचान चुराकर नहीं।

शहीद स्मृति द्वार सिर्फ पत्थर नहीं होते –
वे हमारे गांव, समाज और देश के स्मृति चिन्ह होते हैं।
उनका अपमान, हर एक सैनिक के बलिदान का अपमान है।

अब समय है – उठिए, बोलिए, और सच्चाई का साथ दीजिए।

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